Moral Stories In Hindi For Kids

Moral Stories In Hindi For Kids

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1. शेर और तीन बैल:-

एक बार की बात है तीन बैल आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे। वे साथ मिलकर घास चरने जाते थे और बिना किसी मनमुटाव के सब कुछ आपस में बांटते थे। एक शेर काफी दिनों से उनके पीछे पड़ा था परंतु वह शेर जानता था की जब तक यह तीनों एक साथ में हैं वह शेर उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

शेर ने उन तीनों को एक दूसरे से अलग करने की चाल चली और सभी जगह उन तीनों के बारे में गलत अफवाह फैलाने लगा। अफवाहें सुनकर उन तीनों में मनमुटाव पैदा हो गया। और वह तीनों धीरे-धीरे वह एक दूसरे से जलने लगे और एक दिन उन तीनों में झगड़ा हो गया तथा वह अलग-अलग रहने लगे। शेर के लिए यह बहुत अच्छा मौका था और उसने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। उसने एक एक करके तीनों बैलों को मार दिया और खा गया।

शिक्षा:- इससे हमें यह सीख मिलती है एकता की हमेशा जीत होती है।

2. बुद्धिमान गीदड़:-

एक दिन एक भूखा शेर जंगल में शिकार की तलाश में टहल रहा था। उसे कोई शिकार नहीं मिल रहा था और वह थक भी गया था तभी अचानक उसे एक गुफा दिखाई दी उसने सोचा, इसमें जरूर कोई रहता होगा क्यों ना चल कर देखा जाए। शेर गुफा के अंदर पहुंचा लेकिन वहां कोई नहीं था। खत्म होने के कारण उसने सोचा क्यों ना यहां कुछ देर आराम भी कर ले और जो इसमें रहता होगा वह भी आ जाएगा। वह गुफा में छुप कर बैठ गया।

थोड़ी देर के बाद उसमें रहने वाला गीदड़ वहां पहुंचा। उसे गुफा के बाहर किसी के पैरों के निशान दिखाई दिए। उसे यह निशान किसी बड़े एवं खतरनाक जानवर के प्रतीत हुए। उसे किसी खतरे का अहसास हुआ परंतु हिरण बहुत चालाक और सयाना था। उसने सोचा कि गुफा में जाने से पहले देखें मामला क्या है ? उसने जोर से गुफा को आवाज लगाई – “गुफा ओ गुफा” लेकिन जवाब कौन देता ! गीदड़ ने फिर आवाज लगाई – “अरे मेरी प्यारी गुफा, तू जवाब क्यों नहीं देती? आज तुझे क्या हो गया, हमेशा मेरे लौटने पर तू मेरा स्वागत करती थी आज क्या होगा अगर तुने जवाब ना दिया तो मैं किसी दूसरी गुफा में चला जाऊंगा”।

गीदड़ की बात सुनकर शेर ने सोचा कि यह गुफा तो बोलकर गीदड़ का स्वागत करती है। आज मेरे यहां होने की वजह से शायद डर गई है। अगर गीदड़ का स्वागत नहीं किया तो वह चला जाएगा। शेर ने विचार कर इतनी भारी आवाज में जोर से बोला -“आओ आओ मेरे दोस्त तुम्हारा स्वागत है।” शेर की भारी और जोरदार आवाज सुनकर गीदड़ वहां से भाग गया उसने अपनी बुद्धि और विवेक के बल पर अपनी जान बचा ली।

शिक्षा:- हम अपनी विवेक एवं बुद्धि के दम पर किसी को भी हरा सकते हैं एवं कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं।

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3. लालची कुत्ता:-

एक बार एक कुत्ता बहुत ही भूखा था। वह सभी जगह खाने की तलाश कर रहा था तभी उसे एक रोटी मिल गई। वह रोटी का पूरा आनंद लेना चाहता था इसीलिए किसी शांत जगह की तलाश में रोटी मुंह में दबाकर नदी की ओर चल दिया। नदी पर एक छोटा पुल था जब वह पुल पार कर रहा था तभी उसे पानी में अपनी परछाई दिखाई दी। उसने अपनी परछाई को दूसरा कुत्ता समझ लिया और उसकी रोटी छीनने का सोचा। रोटी छीनने के लिए उसने भोंकते हुए नदी में छलांग लगा दी। मुंह खोलते ही उसकी रोटी नदी के पानी में गिर गई और बह गई। और वह कुत्ता मुंह का ही रह गया।

शिक्षा:- इसीलिए कहते हैं कभी लालच नहीं करनी चाहिए।

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4. प्यासा कौवा:-

एक समय की बात है जंगल में एक कौआ रहता था। एक दिन उस कौए को बहुत जोर से प्यास लगी, वह पानी की तलाश में बहुत दूर-दूर तक उड़ाता रहा, परंतु उसे पानी कहीं नहीं मिला। जब वह बहुत थक गया तो उसे आखिर में एक पानी का घड़ा दिखाई दिया जिसमें बहुत कम पानी था। कोए ने पानी पीने की कोशिश की परंतु वह असफल रहा। उसने हर तरह से पानी पीने की कोशिश की परंतु वह फिर भी पानी नहीं पी पाया। कौआ हैरान हो गया तभी उसे एक तरकीब सूजी। वह आसपास के कंकड़ एवं पत्थर एक-एक करके मटके मे डालने लगा और पानी धीरे-धीरे करके ऊपर आ गया और कोई नें जी भर कर पानी पिया।

शिक्षा:- से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आपने सहनशक्ति से कोई भी काम पूरा कर सकते हैं।

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5. कबूतर और चींटी:-

बहुत समय पहले कि बात है, एक प्यासा कबुतर नदी किनारे पानी पिने उतरा, पानी पीते हुए कबुतर ने एक बहती हुई एक चीटी देखी, कबुतर के मन मे चीटी को बचाने का विचार आया, कबुतर उडकर वृक्ष से एक पत्ता तोड़ लाया, और फिर नदी कि ओर गया। चीटी के पास पहुचकर कबुतर ने चोच में दबा पत्ता उसके निकट डाल दिया। जान बचाने के लिए चीटी तैर कर पत्ते पर चढ़ गयी। पानी में बहता हुआ पत्ता किनारे पर पहुँचा और चीटी की जान बच गई। चीटी की जान बचा कर प्रसन्न कबुतर आकाश में उड गया। चीटी ने कबुतर को मन ही मन धन्यवाद दिया। कुछ दिन बाद जंगल में एक शिकारी शिकार करने आया। अपने बिल के पास बैठी चीटी ने उसे देख लिया था। तभी एक पेड़ पर वही कबुतर आकर बैठ गया। कबुतर घोसलें के बच्चों को दाना खिलाने लगा। वह शिकारी से अनजान था। शिकारी ने कबुतर को देखा तो वह दबे पाँव पेड़ कि ओर बढ़ चला। चीटी समझ गयी की कबुतर कि जान खतरे में है, उसने कबुतर को बचाने का निश्चय किया। चीटी तेजी से निशाना साधते हुए शिकारी कि ओर दौड़ी। और शिकारी के पैरों पर जोर से काट लिया। ठीक उसी समय शिकारी ने गोली चलाई परन्तु चीटी के काटने की वजह से शिकारी का निशाना चुक गया। और गोली कि आवाज सुनते ही कबुतर उड़ गया। काटने के पश्चात चीटी शिकारी की टांग से कुद गई। दर्द से छटपटाता हुआ शिकारी अपने पाव सहलाने लगा। शिकारी ने निराश होकर उडते हुए कबुतर को देखा और वहाँ से चला गया। इस प्रकार चीटी ने उपकारी कबुतर कि जान बचा ली।

शिक्षा:- भलाई के बदले भलाई ही मिलती है।

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